सरसों के तेल में मिलावट और महामारी जलोदर

भारत में रसोईघर में सरसों के तेल का उपयोग बहुतायत से किया जाता है। लेकिन कई बार मुनाफे के चक्कर में इसमें हानिकारक और सस्ते पदार्थों की मिलावट कर दी जाती है। सरसों के तेल में की जाने वाली सबसे प्रमुख और खतरनाक मिलावट आर्जीमोन तेल (सत्यानाशी के बीजों का तेल) की होती है।

यदि सरसों के तेल में आर्जीमोन के तेल की थोड़ी सी भी मिलावट हो, तो यह सेहत के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है। इस मिलावटी तेल का अल्प अवधि या कम समय के लिए भी सेवन करने से महामारी जलोदर (Epidemic Dropsy) नामक गंभीर बीमारी हो जाती है।

इस बीमारी के कारण शरीर के निचले हिस्सों, विशेषकर पैरों में भारी सूजन आ जाती है। इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ, त्वचा पर लाल चकत्ते, दस्त और हृदय से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। आर्जीमोन के तेल में मौजूद विषैले तत्व शरीर की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।

इस खतरे से बचने के लिए हमेशा जांचे-परखे और एगमार्क (AGMARK) प्रमाणित शुद्ध सरसों के तेल का ही उपयोग करना चाहिए। यदि तेल के रंग या स्वाद में कोई असामान्य बदलाव दिखे, तो उसका सेवन तुरंत रोक दें।

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