महिला नबी को क्या कहा जाता है? (इस्लामिक धर्मशास्त्र और इतिहास का एक विहंगम दृष्टिकोण) - भाग १

इस्लामिक इतिहास, धर्मशास्त्र (तेओलॉजी) और कुरआनी अध्ययन में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विचारणीय विषय रहा है कि क्या पैगंबर या नबी के रूप में महिलाओं का चयन किया गया था और उन्हें अरबी भाषा में क्या कहा जाता है। सामान्य बोलचाल और धार्मिक ग्रंथों में 'नबी' (Prophet) और 'रसूल' (Messenger) वे पुरुष हस्तियां रही हैं जिन्हें अल्लाह ने सीधे तौर पर पूरी मानवता के मार्गदर्शन के लिए अपनी वाणी (वही) के साथ भेजा। ऐसे में यह जिज्ञासा स्वाभाविक है कि क्या महिला नबी का कोई अलग पदनाम या परिभाषा है? इस लेख के पहले भाग में हम इसी theological (धार्मिक) बहस, शब्दावली और ऐतिहासिक संदर्भ की गहराई से चर्चा करेंगे।

1. 'नबी' और 'रसूल' की मूल परिभाषा और लिंग भेद

इस्लामिक परंपरा के अनुसार, 'नबी' वह शख्सियत होती है जिसे अल्लाह तआला अपने संदेश से अवगत कराते हैं ताकि वह लोगों को नेकी की राह दिखाएं। पारंपरिक मुख्यधारा के अधिकांश इस्लामिक विद्वानों (उलेमा) का यह अकाट्य मत रहा है कि विधिवत रूप से जिन पैगंबरों को समुदाय के मार्गदर्शन, कानून लाने और खुली नुबूवत (पैगंबर के पद) के साथ भेजा गया, वे सभी पुरुष ही थे। कुरआन मजीद में भी स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि बस्तियों और समाजों की ओर भेजे जाने वाले पैगंबर मर्द ही थे— "और हमने तुझसे पहले जितने भी रसूल भेजे, मर्दों को ही भेजा, जिनकी तरफ हम वही (संदेश) भेजते थे..."

इस आधार पर, अरबी व्याकरण या इस्लामिक परिभाषा में महिला पैगंबर के लिए कोई अलग से स्वतंत्र और व्यापक रूप से स्वीकृत प्रशासनिक पदवी (जैसे 'नबिया' शब्द का प्रयोग सैद्धांतिक रूप से भले ही किया जाए) मुख्यधारा के धार्मिक पद के रूप में स्थापित नहीं है। नबी का स्त्रीलिंग व्याकरण की दृष्टि से 'नबिया' (Nabiyyah) हो सकता है, परंतु इस्लामी न्यायशास्त्र (फिकह) और पैगंबरों के आधिकारिक इतिहास में इसे औपचारिक पैगंबरी के दर्जे के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है।

2. विशेष देवदूतिय संवाद (वही) और चुनिंदा महिलाओं का दर्जा

यद्यपि अधिकांश विद्वान यह मानते हैं कि बड़े पैगंबर और कानून (शरियत) लाने वाले संवाहक पुरुष ही थे, फिर भी इस्लामिक धर्मशास्त्र इस बात से इनकार नहीं करता कि अल्लाह ने इतिहास की कुछ महान और पवित्र महिलाओं को विशेष दिव्य सम्मान, अंतःप्रेरणा (इल्हाम) और फरिश्तों के माध्यम से संदेश (वही) जरूर प्रदान किए।

इमाम इब्ने हज़्म और कुछ अन्य प्रसिद्ध मुफस्सिरीन (कुरआन के व्याख्याकारों) का यह मत रहा है कि हज़रत मरियम (मरीअम अलैहिस्सलाम), हज़रत मूसा की वालिदा (माता), और हज़रत सारा जैसी महान हस्तियों को अल्लाह की तरफ से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ था। फरिश्तों ने स्वयं हज़रत मरियम से संवाद किया था, जिसका जिक्र पवित्र कुरआन के सूरा आले-इमरान और सूरा मरियम में विस्तार से मिलता है।

(यह इस लेख का पहला भाग है। अगले भाग में हम उन विशिष्ट महिलाओं के बारे में विस्तार से जानेंगे जिन्हें कुरआन में सर्वोच्च आध्यात्मिक पद और दिव्यानुभूति से नवाजा गया है, तथा इस विषय पर विभिन्न इस्लामिक चिंतकों के क्या मत हैं।)