1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध: एक ऐतिहासिक विश्लेषण और कूटनीति
वर्ष 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध दक्षिण एशिया के आधुनिक इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ों में से एक है। यह वह संघर्ष था जिसने दोनों पड़ोसी देशों के सैन्य सामर्थ्य, रणनीतिक सोच और राजनीतिक नेतृत्व की कड़ी परीक्षा ली थी।
युद्ध की पृष्ठभूमि और शुरुआत
सन् 1965 के मध्य तक दोनों देशों के बीच तनाव अपनी पराकाष्ठा पर पहुंच चुका था। वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व को यह गलतफहमी हो गई थी कि भारतीय सेना कमजोर हो चुकी है और वह एक बड़े सैन्य दबाव का सामना नहीं कर पाएगी। इसी गलतफहमी के आधार पर पाकिस्तान ने अप्रैल 1965 में कच्छ के रण (Rann of Kutch) में उकसावे की कार्रवाई की, जिसे एक समझौते के तहत शांत कर लिया गया था।
इसके बाद पाकिस्तान ने अगस्त 1965 में 'ऑपरेशन जिब्राल्टर' (Operation Gibraltar) को अंजाम दिया।
भारत का साहसिक पलटवार और लाहौर मोर्चा
जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी और पाकिस्तान ने 1 सितंबर 1965 को अखनूर सेक्टर पर भारी टैंकों और वायुसेना के समर्थन से एक पारंपरिक सैन्य हमला (ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम) कर दिया, तब भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने एक अत्यंत साहसिक और निर्णायक राजनीतिक निर्णय लिया।
यह वह ऐतिहासिक क्षण था जिसने पाकिस्तानी सेना को पूरी तरह सन्न कर दिया।
वाघा-डोगराई सेक्टर
खालरा-बुरकी सेक्टर
खेमकरण-कसूर सेक्टर
भारतीय सेना की इस त्वरित और अप्रत्याशित कार्रवाई ने पाकिस्तानी सैन्य योजना को तहस-नहस कर दिया।
यह वीडियो 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की परिस्थितियों, रणनीतिक चालों और मैदानी संघर्षों की एक विस्तृत ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्रदान करता है।
युद्ध के अंतिम चरण में, जब भारतीय सेना ने लाहौर और सियालकोट सेक्टर में कड़े मुकाबले के बाद बढ़त हासिल कर ली थी और पाकिस्तान के पैटन टैंकों को 'अअसल उत्तर' की लड़ाई में ध्वस्त कर दिया था, तब अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ने लगा।
ताशकंद समझौते के तहत दोनों देशों ने युद्ध से पहले की स्थिति में लौटने पर सहमति जताई और जीते हुए इलाके वापस कर दिए। तकनीकी और कूटनीतिक रूप से इसे अनिर्णायक (Inconclusive) युद्ध माना जाता है क्योंकि कोई स्पष्ट भू-भाग परिवर्तन नहीं हुआ।
हालांकि, रणनीतिक दृष्टि से भारत का पलड़ा भारी रहा क्योंकि उसने पाकिस्तान के घुसपैठ और बड़े आक्रमण के मंसूबों को पूरी तरह विफल कर दिया था।

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