इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के इतिहास में गुजरात टाइटंस (Gujarat Titans) का सफर बेहद रोमांचक, प्रेरणादायक और रिकॉर्डतोड़ रहा है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम यानी अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को अपना होम ग्राउंड बनाने वाली इस फ्रेंचाइजी ने बहुत कम समय में भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। लेकिन इस टीम की शुरुआत कैसे हुई, इसे सबसे पहले किसने खरीदा था और समय के साथ इसके स्वामित्व (Ownership) में क्या-क्या बड़े बदलाव आए, यह कहानी हर क्रिकेट प्रेमी के लिए जानना बेहद दिलचस्प है।

गुजरात टाइटंस की स्थापना और शुरुआती खरीदार (2021)

जब बीसीसीआई (BCCI) ने साल 2021 में आईपीएल के विस्तार (Expansion) की घोषणा की और दो नई टीमों को शामिल करने का फैसला किया, तब पूरी दुनिया के बड़े कॉर्पोरेट घरानों की नजरें इस पर टिकी थीं। उस समय अहमदाबाद फ्रेंचाइजी को खरीदने के लिए कई बड़ी कंपनियों ने बोली लगाई थी।

अक्टूबर 2021 में जब टेंडर प्रक्रिया पूरी हुई, तो इंटरनेशनल प्राइवेट इक्विटी फर्म CVC कैपिटल पार्टनर्स (CVC Capital Partners) ने बाजी मार ली। CVC कैपिटल ने अहमदाबाद आधारित इस फ्रेंचाइजी को खरीदने के लिए ₹5,600 करोड़ (लगभग 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर) की भारी-भरकम बोली लगाई थी। यह निवेश इस बात का प्रमाण था कि भारतीय क्रिकेट लीग का वैश्विक बाजार में कितना बड़ा कद है। CVC कैपिटल ने 'इरेलिया कंपनी प्राइवेट लिमिटेड' (Irelia Company Pte Ltd) के माध्यम से इस टीम का पूरा स्वामित्व अपने हाथ में लिया था।

पहले ही सीजन में ऐतिहासिक सफलता

CVC कैपिटल के मालिकाना हक और आशीष नेहरा की कोचिंग तथा ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या की कप्तानी में गुजरात टाइटंस ने साल 2022 के अपने डेब्यू सीजन में ही तहलका मचा दिया। इस नई टीम ने अपने पहले ही प्रयास में आईपीएल की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। आईपीएल इतिहास में ऐसा कारनामा करने वाली वह राजस्थान रॉयल्स के बाद केवल दूसरी टीम बनी। इसके बाद अगले सीजन यानी 2023 में भी टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता (Runner-up) का खिताब हासिल किया। शुरुआती दो वर्षों में ही इस फ्रेंचाइजी ने खेल के मैदान के साथ-साथ ब्रांड वैल्यू के मामले में भी अपनी एक मजबूत पहचान बना ली थी।

(यह इस लेख का पहला भाग है। इसके अगले भाग में हम जानेंगे कि कैसे बाद में गुजरात टाइटंस के स्वामित्व में एक बहुत बड़ा बदलाव आया और किस प्रमुख भारतीय उद्योग समूह ने इसमें बहुसंख्यक हिस्सेदारी खरीदी।)

A little-known fact most people miss

जब भी आईपीएल फ्रेंचाइजी के मालिकाना हक और उनकी वित्तीय डील की बात होती है, तो ज्यादातर लोग केवल बड़ी कंपनियों के निवेश और शुरुआती बोली पर ही ध्यान देते हैं। लेकिन एक ऐसा पहलू है जिस पर अक्सर लोगों का ध्यान नहीं जाता, वह है प्राइवेट इक्विटी फर्म्स और कॉर्पोरेट घरानों के बीच का लॉन्ग-टर्म स्ट्रैटेजिक लॉक-इन पीरियड। बीसीसीआई के नियमों के मुताबिक, कोई भी नया मालिक शुरुआती कुछ वर्षों तक अपनी बहुसंख्यक हिस्सेदारी सीधे नहीं बेच सकता था। यही कारण है कि सीवीसी कैपिटल पार्टर्स को अपनी रणनीतिक साझेदारी और हिस्सेदारी में बदलाव करने के लिए सही समय और लॉक-इन अवधि समाप्त होने का इंतजार करना पड़ा। इसके अलावा, इस पूरी प्रक्रिया में विदेशी विनिमय प्रबंधन अधिनियम (फेमा) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है, जो पर्दे के पीछे की गई इस डील को बेहद जटिल बना देता है।

Frequently Asked Questions

गुजरात टाइटन्स के मौजूदा मालिक कौन हैं?

वर्तमान में टोरेंट ग्रुप के पास इस फ्रेंचाइजी की बहुसंख्यक हिस्सेदारी (लगभग 67 प्रतिशत) है, जबकि सीवीसी कैपिटल पार्टर्स के पास 33 प्रतिशत अल्पमत हिस्सेदारी सुरक्षित है।

क्या टीम के मालिकाना हक बदलने से टीम के प्रदर्शन पर असर पड़ा है?

नहीं, कॉर्पोरेट स्वामित्व बदलने से टीम के कोचिंग स्टाफ, खिलाड़ियों के चयन और ऑन-फील्ड रणनीतियों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है, क्योंकि पेशेवर प्रबंधन खेल के मामलों को स्वतंत्र रूप से संभालता है।

सीवीसी कैपिटल पार्टर्स ने टीम क्यों बेची?

सीवीसी ने अपनी शुरुआती निवेश रणनीति के तहत आंशिक मुनाफावसूली और स्थानीय कॉर्पोरेट दिग्गज टोरेंट ग्रुप के साथ मिलकर टीम को गुजरात के स्थानीय प्रशंसकों से और अधिक गहराई से जोड़ने के उद्देश्य से यह कदम उठाया।

क्या भविष्य में आईपीएल टीमों के दाम और बढ़ सकते हैं?

हाँ, दुनिया भर में आईपीएल की लोकप्रियता, ब्रॉडकास्टिंग राइट्स और विज्ञापनों से होने वाली बंपर कमाई को देखते हुए फ्रेंचाइजी का मूल्यांकन आने वाले वर्षों में और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है।

End with a clear call to action

यदि आप भारतीय क्रिकेट और आईपीएल के वित्तीय पहलुओं को बारीकी से समझना चाहते हैं, तो आपको केवल मैदान पर होने वाले छक्कों-चौकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके बिजनेस मॉडल और कॉर्पोरेट रणनीतियों का भी अध्ययन करना चाहिए। आज ही अपने दोस्तों के साथ इस विषय पर चर्चा करें और खेल के व्यावसायिक पक्ष को गहराई से जानें!