फुटबॉल खेल का जन्मदाता देश कौन सा है?: एक ऐतिहासिक यात्रा - प्रथम भाग

आधुनिक फुटबॉल का जन्मस्थान: इंग्लैंड

जब बात आधुनिक फुटबॉल (Modern Football) के औपचारिक जन्म की आती है, तो आधिकारिक तौर पर इंग्लैंड (England) को इस खेल का जन्मदाता देश माना जाता है।

  • साल 1863 और द फुटबॉल एसोसिएशन: आधुनिक फुटबॉल का संगठित इतिहास 19वीं सदी के मध्य से शुरू होता है। साल 1863 में इंग्लैंड में 'द फुटबॉल एसोसिएशन' (The Football Association) की स्थापना हुई थी।

  • नियमों का निर्धारण: इसी संगठन ने पहली बार इस खेल के स्पष्ट और लिखित नियम तय किए, ताकि हाथों से गेंद उठाने पर रोक लगाई जा सके और इसे पूरी तरह से पैरों से खेले जाने वाले खेल के रूप में स्थापित किया जा सके।

  • यही वह महत्वपूर्ण मोड़ था जिसके बाद से इंग्लैंड को आधुनिक फुटबॉल का आधिकारिक जनक कहा जाने लगा।

प्राचीन इतिहास और अन्य देशों के दावे

हालांकि इंग्लैंड को आधुनिक नियमों वाले फुटबॉल का जन्मदाता माना जाता है, लेकिन यदि हम इस खेल के शुरुआती रूपों (Ancient Forms of Football) की तलाश करें, तो इतिहास के पन्ने हमें कई हजार साल पीछे ले जाते हैं। दुनिया के अलग-अलग प्राचीन सभ्यताओं में गेंद से खेले जाने वाले ऐसे कई खेल मौजूद थे, जो आज के फुटबॉल से मिलते-जुलते थे:

  1. चीन का प्राचीन खेल 'त्सुजू' (Cuju): फीफा (FIFA) के अनुसार, आधुनिक फुटबॉल के शुरुआती रूप का प्रमाण प्राचीन चीन में मिलता है। हान राजवंश (Han Dynasty) के दौरान चीन में 'त्सुजू' नाम का एक खेल खेला जाता था। इसमें चमड़े की गेंद को भरकर पैरों से एक छोटे से छेद में पहुंचाना होता था। इसे दुनिया के सबसे पहले रिकॉग्नाइज्ड बॉल गेम्स में गिना जाता है।

  2. यूनान और रोम की सभ्यताएं: प्राचीन ग्रीस (यूनान) और रोमन साम्राज्य में भी 'एपिसरोस' (Episkyros) और 'हार्पास्टम' (Harpastum) नाम के खेल खेले जाते थे, जिनमें खिलाड़ी पैरों और हाथों दोनों का इस्तेमाल करके गेंद को अपनी टीम के पाले में ले जाने की कोशिश करते थे। हालांकि, ये खेल आज के फुटबॉल की तुलना में काफी हिंसक हुआ करते थे।

  3. मध्यकालीन इंग्लैंड और यूरोप: 12वीं शताब्दी के आसपास इंग्लैंड और यूरोप के कई हिस्सों में 'मॉब फुटबॉल' (Mob Football) खेला जाता था। इसमें गांवों के बीच या सड़कों पर भारी भीड़ एक बड़ी गेंद को अपने नियंत्रण में करने के लिए आपस में भिड़ जाती थी। इस दौरान कोई निश्चित नियम नहीं होते थे और खेल काफी आक्रामक होता था, जिसे बाद में राजाओं और शासकों द्वारा प्रतिबंधित भी करना पड़ा था।

खेल का नाम "फुटबॉल" क्यों पड़ा?

फुटबॉल के नाम के पीछे एक सीधा और तार्किक कारण छिपा है। चूंकि यह खेल मुख्य रूप से पैरों (Feet) की मदद से गेंद (Ball) को आगे बढ़ाकर खेला जाता है, इसलिए इसे 'फुटबॉल' नाम दिया गया। मध्यकाल में जब खेल के मैदान और कुलीन वर्ग के स्कूल सामने आए, तो हाथ से गेंद उठाने वाले रग्बी जैसे खेलों को अलग कर दिया गया और पूरी तरह से पैरों से खेले जाने वाले इस प्रारूप को फुटबॉल के रूप में पहचान मिली।

विशेष नोट: यद्यपि चीन और अन्य प्राचीन सभ्यताओं में पैर से गेंद खेलने वाले खेलों के प्रमाण मिले हैं, लेकिन आज पूरी दुनिया में जिस खेल को नियमों, रेफरी, गोलपोस्ट और पेशेवर लीग के रूप में खेला जाता है, उसका श्रेय पूरी तरह से इंग्लैंड को जाता है।

इस लेख के अगले भाग में हम जानेंगे कि कैसे यह खेल उपनिवेशवाद के जरिए पूरी दुनिया में फैला, भारत में फुटबॉल का प्रवेश कैसे हुआ और कैसे इसने वैश्विक महाकुंभ यानी 'फीफा विश्व कप' का रूप लिया।

History of Football in Hindi

यह वीडियो फुटबॉल के इतिहास और उसके शुरुआती सफर को विस्तार से समझने में आपकी मदद करेगा।

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