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चीन की मिसाइल ताकत: परिचय और भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि
वैश्विक रक्षा और सामरिक मामलों में आज चीन (China) की सैन्य क्षमता एक अत्यंत चर्चा का विषय बनी हुई है। जब भी दुनिया के शक्तिशाली देशों की सैन्य ताकतों की गिनती होती है, तो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) और विशेष रूप से उसकी मिसाइल शाखा—पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF)—का नाम सबसे ऊपर आता है। आधुनिक समय में चीन ने अपनी सैन्य तकनीकों का आधुनिकीकरण जिस गति से किया है, उसने अमेरिका सहित दुनिया के तमाम बड़े देशों की नींद उड़ा दी है। यह लेख इस बात का गहराई से विश्लेषण करता है कि चीन के पास कुल कितने और किस प्रकार के मिसाइल मौजूद हैं, और उसकी यह क्षमता वैश्विक संतुलन को कैसे प्रभावित कर रही है।
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF) की संरचना
चीन के पास मौजूद मिसाइलों के जखीरे को समझने के लिए उसकी विशेष सेना 'रॉकेट फोर्स' को जानना आवश्यक है। पहले इसे 'सेकंड आर्टिलरी कॉर्प्स' के नाम से जाना जाता था, जिसे बाद में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में पूरी तरह से एक स्वतंत्र और आधुनिक शाखा यानी 'रॉकेट फोर्स' में बदल दिया गया। यह बल चीन की पारंपरिक (Conventional) और रणनीतिक परमाणु मिसाइलों (Strategic Nuclear Missiles) दोनों का प्रत्यक्ष नियंत्रण और संचालन करता है।
अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) और स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के पास विभिन्न श्रेणियों की हजारों मिसाइलें मौजूद हैं। इसमें कम दूरी की सामरिक मिसाइलों से लेकर महाद्वीपीय दूरी तय करने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) तक शामिल हैं।
परमाणु मिसाइलों और वारहेड्स का विस्तार
जहां तक चीन के परमाणु हथियारों और उनसे जुड़ी मिसाइलों का सवाल है, चीन तेजी से अपने परमाणु जखीरे का विस्तार कर रहा है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, चीन के पास वर्तमान में लगभग 620 सक्रिय परमाणु वारहेड्स मौजूद हैं, और आने वाले वर्षों में इनकी संख्या में और अधिक तेजी से वृद्धि होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
चीन ने अपने देश के उत्तरी हिस्सों में कई बड़े मिसाइल साइलो (Silo Fields) का निर्माण किया है, जहां अत्याधुनिक परमाणु मिसाइलों को तैनात और संग्रहीत किया जा रहा है। इन साइलो के जरिए चीन किसी भी आपातकालीन स्थिति में अपनी पहली या दूसरी स्ट्राइक क्षमता को अत्यधिक मजबूत बना रहा है।
प्रमुख मिसाइल श्रेणियां और उनकी मारक क्षमता
चीन के मिसाइल शस्त्रागार को मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
कम और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (SRBM & MRBM): ताइवान जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय विवादों को ध्यान में रखते हुए चीन के पास हजारों की संख्या में ऐसी मिसाइलें हैं जो कुछ सौ से लेकर 2,000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती हैं।
इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें (IRBM): इनमें 'डीएफ-26' (DF-26) जैसी मिसाइलें प्रमुख हैं, जिन्हें 'गुआम किलर' के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह प्रशांत महासागर में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाने में सक्षम हैं।
महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM): चीन की रणनीतिक ताकत की असली रीढ़ इसकी आईसीबीएम मिसाइलें हैं, जैसे कि 'डोंगफेंग-41' (DF-41)। यह मिसाइल 12,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकती है और एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने (MIRV तकनीक) में सक्षम है।
निष्कर्ष
चीन की मिसाइल ताकत केवल संख्या के लिहाज से ही नहीं, बल्कि उनकी मारक क्षमता, सटीकता और तकनीकी आधुनिकता के मामले में भी बहुत आगे निकल चुकी है। यद्यपि सटीक आंकड़ों को लेकर विभिन्न रक्षा एजेंसियों के अनुमानों में थोड़ा अंतर हो सकता है, लेकिन यह स्पष्ट है कि बीजिंग ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक स्तर पर अपनी सैन्य धमक को पूरी तरह से स्थापित कर लिया है। इस प्रथम भाग के बाद, अगले भाग में हम चीन की मिसाइलों की सटीक संख्या, पारंपरिक बनाम परमाणु वर्गीकरण और भारत व अमेरिका पर इसके रणनीतिक प्रभावों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
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इस विषय को और गहराई से समझने के लिए ऊपर दिए गए वीडियो देख सकते हैं, जो चीन की मिसाइल ताकतों और उनकी कार्यप्रणाली का विस्तृत विश्लेषण करते हैं।
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