भारतेन्दु हरिश्चंद्र: आधुनिक हिंदी के जनक
जब भी हिंदी की बात होती है, एक नाम खास तौर पर उभरता है — भारतेन्दु हरिश्चंद्र। उन्हें आधुनिक हिंदी का जनक माना जाता है। न सिर्फ साहित्य, बल्कि नाटक, कविता और व्यंग्य लेखन में भी उनका योगदान अद्वितीय है।
भारतेन्दु हरिश्चंद्र का जन्म 9 सितंबर, 1850 को काशी (वाराणसी) में हुआ था। बचपन से ही उनमें कविता और नाटक के प्रति गहरी रुचि थी। केवल पाँच वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली कविता लिख दी थी। यही नहीं, वे नाटकों के माध्यम से समाज में बदलाव लाना चाहते थे। उनके नाटक न सिर्फ मनोरंजक थे, बल्कि सामाजिक बुराइयों पर तीखा व्यंग्य करते थे।
उनके खून में हास्य-व्यंग्य की झलक थी, लेकिन उसके पीछे एक सचेत समाज का सपना छिपा था। वे हिंदी को संस्कृत के भार से आज़ाद कर आम आदमी तक पहुँचाना चाहते थे। उन्होंने खड़ी बोली को साहित्य का माध्यम बनाया और उसे जीवंत, स्पष्ट और समकालीन बनाया।
भारतेन्दु ने न केवल हिंदी को आधुन
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