कलम की शक्ति: तलवार से भी बड़ी

“कलम तलवार से ताकतवर होता है”—यह कहावत सदियों से हमारे समाज में प्रचलित है और आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है। इसका मतलब यह नहीं कि कलम धातु की तलवार से भारी होती है, बल्कि इसकी इतिहास बदलने, विचार जगाने और समाज को आगे बढ़ाने की होती है।

एक तलवार से आप किलोमीटर भर का इलाका जीत सकते हैं, लेकिन एक कलम से लिखे गए शब्द पीढ़ियों तक जीवित रहते हैं। महात्मा गांधी ने कभी तलवार नहीं उठाई, लेकिन उनके लेख, भाषण और पत्रों ने पूरे भारत को जगाया। बापू के शब्दों ने सत्याग्रह की शक्ति दिखाई, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य भी झुक गया।

कलम की शक्ति इसलिए भी बड़ी है क्योंकि वह नफरत नहीं, बल्कि समझ बढ़ाती है। एक लेखक या कवि के शब्द ऐसे होते हैं जो दिलों में उतर जाते हैं। तलवार डर पैदा करती है, जबकि कलम आशा बुनाती है।

आज के डिजिटल युग में भी यह सचाई वैसी की वैसी है। सोशल मीडिया पर एक सच्ची कहानी, एक स्पर्शी प

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