कृष्ण ने वृंदावन क्यों छोड़ा?

वृंदावन उन अनुपम पलों का प्रतीक है, जब कृष्ण एक बालक के रूप में गोप-गोपिकाओं के बीच लीलाएँ करते रहे। यहाँ का हर पेड़, हर नंदनवन, हर बाँसुरी की धुन कृष्ण-प्रेम की गहराई से गूँजती है। फिर भी, एक दिन कृष्ण ने वृंदावन छोड़ दिया। कई लोग इसे दुखद मानते हैं, लेकिन इसके पीछे एक गहरा कारण था।

कृष्ण के वृंदावन छोड़ने का बाहरी कारण यह था कि उन्हें राक्षसों का वध करना था, धर्म की स्थापना करनी थी और धरती माता के दुखों को दूर करना था। जब धरती पर अधर्म बढ़ गया, तो उन्होंने विष्णु के रूप में प्रकट होकर अपने वादे को निभाया।

वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने अन्य भक्तों के लिए भी मथुरा जाना चाहते थे। वहाँ के लोग भी उनके प्रेम में डूबे हुए थे। इसलिए यह निर्णय केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और प्रेमपूर्ण दायित्व का हिस्सा था।

हालाँकि वे शारीरिक रूप से वृंदावन छोड़ गए, लेकिन उनका

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