भारत: पुरुष प्रधान समाज और महिला सशक्तिकरण
भारत को लंबे समय से एक पुरुष प्रधान समाज माना जाता रहा है। परिवार हो या राजनीति, सरकारी नौकरी हो या व्यापार, अक्सर फैसले लेने का अधिकार पुरुषों के हाथ में ही रहा है। घर में भी पिता या पति को मुखिया माना जाता है, जबकि महिलाओं की भूमिका अक्सर सहायक या सहनशील चरित्र तक सीमित रही है।
लेकिन सच यह है कि समय बदल रहा है। आज भारत में महिलाएं सरकार से लेकर सेना, खेल से लेकर विज्ञान तक हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन चुका है। सरकार ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए हैं—बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियानों से लेकर महिलाओं के लिए आरक्षण तक।
फिर भी, गाँव की गलियों से लेकर शहरी कार्यालयों तक, कई जगह पुरानी मान्यताएँ अभी भी जिंदा हैं। महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए लड़ना पड़ता है। इसीलिए, एक पुरुष प्रधान समाज में रहते हुए भी, महिला सशक्तिकरण की बात करना और भी जरूर
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।