गांधी जी का ग्राम स्वराज: एक जीवंत सपना
महात्मा गांधी का ग्राम स्वराज का विचार केवल एक सैद्धांतिक धारणा नहीं, बल्कि भारत के गांवों को सशक्त बनाने की आह्वान था। वे मानते थे कि सच्चा लोकतंत्र तभी संभव है जब ताकत सीधे जनता के हाथ में हो। इसी कड़ी में पंचायत राज की व्यवस्था उनके लिए स्वराज की आधारशिला थी।
गांधी जी के अनुसार, हर गांव एक स्वयं निर्भर इकाई होनी चाहिए — जहां लोग अपने मुद्दों पर खुद निर्णय लें, संसाधनों का उपयोग समुदाय की भलाई के लिए करें और न्याय स्थानीय स्तर पर ही मिले। उन्होंने कहा था, “पंचायत राज सच्चे लोकतंत्र का प्रतिनिधित्व करता है जिसे महसूस किया गया है।”
आज भी, जब हम ग्रामीण विकास और स्थानीय शासन की बात करते हैं, तो गांधी का यह सपना प्रासंगिक लगता है। गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर स्थानीय पंचायतें अहम भूमिका निभा सकती हैं। लेकिन इसके लिए सच्ची भागीदारी और पारदर्शिता जरूरी
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