भारत छोड़ो आंदोलन: एक ऐतिहासिक प्रस्थान

भारत छोड़ो नारा 1942 में महात्मा गांधी द्वारा दिया गया एक ऐतिहासिक नारा था, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश था। यह नारा उस समय जारी किया गया जब देश अंग्रेजों के खिलाफ अपनी आजादी के लिए तेजी से जुट रहा था।

4 अगस्त, 1942 को मुंबई के गोवालिया टैंक मैदान में, जिसे आज अगस्त क्रांति मैदान के नाम से जाना जाता है, गांधीजी ने एक जोशीला भाषण दिया। इस भाषण में उन्होंने “करो या मरो” का संकल्प दिया, जिसका अर्थ था कि अब आजादी के लिए लड़ना ही एकमात्र रास्ता है। यह आंदोलन साताखंड के बावजूद देश के हर कोने में फैल गया।

हालांकि, 'भारत छोड़ो' नारे को गांधीजी ने जारी तो किया, लेकिन इस शब्द के प्रयोग का श्रेय कभी-कभी विनोबा भावे या अन्य नेताओं को भी दिया जाता है। लेकिन इतिहास साफ करता है कि यह नारा गांधी के नेतृत्व में राष्ट्रीय आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

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