नमक आंदोलन क्यों हुआ था?

नमक आंदोल भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। ब्रिटिश शासकों ने न सिर्फ कपड़े और चाय पर, बल्कि नमक जैसी रोजमर्रा की चीज पर भी अपना कब्जा जमा लिया था। उस समय भारतीयों को नमक बनाने की इजाजत नहीं थी। वे अपने तटों पर मिलने वाले नमक का उपयोग भी नहीं कर सकते थे। सरकार नमक पर भारी टैक्स लगाती थी और विदेशों से आने वाले नमक के लिए भारतीयों से कई गुना ज्यादा पैसे वसूले जाते थे।

महात्मा गांधी ने इस अन्याय के खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया। 12 मार्च, 1930 को उन्होंने डांडी तट तक लंबी पदयात्रा शुरू की और 6 अप्रैल को समुद्री पानी से घर पर नमक बनाकर कानून की खुली अवज्ञा की। यह छोटी सी कार्रवाई पूरे देश में तूफान बनकर उठी। लाखों लोगों ने नमक कानून तोड़ा और ब्रिटिश सरकार के खिलाफ एकजुट हो गए।

नमक आंदोलन सिर्फ नमक के लिए नहीं, बल्कि अंग्रेजों के अन्याय और शोषण के खिलाफ एक जन-आंदोलन था। इसने पूरी

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