सिंधु घाटी सभ्यता: विश्व की सबसे बड़ी प्राचीन सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता विश्व की सबसे बड़ी प्राचीन सभ्यता मानी जाती है। यह ताम्रपाषाण और कांस्य युग के दौरान, लगभग 2600 ईसा पूर्व में अपने चरम पर थी। इस सभ्यता का विस्तार आज के भारत, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विस्तृत क्षेत्र में था, जिससे यह आकार में उस समय की किसी भी सभ्यता से बड़ी साबित हुई।
इस सभ्यता की खोज 1921 में दयाराम साहनी ने की। उनके प्रयासों से हड़प्पा में प्राचीन बस्ती के अवशेष मिले, जिसके बाद इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाने लगा। बाद में, ब्रिटिश पुरातत्वविद् जॉन मार्शल ने 'सिंधु घाटी सभ्यता' शब्द का प्रयोग करके इसकी वैश्विक पहचान बनाई।
मोहनजो-दड़ो, हड़प्पा और धौलावीरा जैसे स्थलों से मिले जालीदार नगर नियोजन, जल निकासी तंत्र और अनगिनत मुहरें इस बात के प्रमाण हैं कि यह सभ्यता अत्यंत विकसित थी। सिंधु घाटी के लोग व्यापार, कृषि और शिल्प में निपुण थे।
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