पृथ्वी की सबसे आंतरिक परत: धात्विक क्रोड

पृथ्वी की संरचना कई परतों से मिलकर बनी है, और इनमें सबसे भीतर वाली परत को धात्विक क्रोड कहा जाता है। यह पृथ्वी की सबसे गहरी परत है, जो लोहा, निकेल और कुछ अन्य भारी धातुओं से बनी है।

धात्विक क्रोड दो भागों में बंटा होता है – बाहरी क्रोड तरल अवस्था में होता है, जबकि आंतरिक क्रोड ठोस है। यह ठोस अवस्था इतने अधिक दबाव के कारण है कि यहां तक कि अत्यधिक गर्मी होने के बावजूद पदार्थ पिघल नहीं पाता।

इस परत का तापमान लगभग 5430 डिग्री सेल्सियस तक होता है, जो सूर्य की सतह के तापमान के करीब है। यह अविश्वसनीय गर्मी और दबाव पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बाहरी क्रोड के तरल धातुओं के घूमने से चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, जो हमें सौर विकिरण से बचाता है।

हालांकि हम धरती के इस केंद्र तक अभी तक नहीं पहुंच पाए हैं, लेकिन भूकंपीय तरंगों के अध्ययन से वैज्ञानिकों

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