कुरान शरीफ़ का अर्थ और इसका महत्व
इस्लाम धर्म में कुरान को सबसे पवित्र और सर्वोच्च धर्मग्रंथ का दर्जा प्राप्त है। सामान्य भाषा में इसे कुरान मज़ीद, कुरान शरीफ़, कलामेपाक या कलामे मज़ीद के नाम से भी जाना जाता है। शाब्दिक रूप से 'कुरान' का अर्थ होता है — "वह पुस्तक जिसे बार-बार पढ़ा जाए" या "बार-बार पढ़ी जाने वाली इबादत"।
मुस्लिम समुदाय की धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुरान किसी इंसान की लिखी हुई किताब नहीं है, बल्कि यह सीधे ईश्वर (ख़ुदा) का कलाम यानी उनकी वाणी है। इस्लामी परंपरा के मुताबिक, ईश्वर ने अपने अंतिम पैगंबर हज़रत मुहम्मद साहब पर देवदूत जिब्रईल (गैब्रिएल) के माध्यम से लगभग 23 वर्षों की अवधि में इन पावन संदेशों को अवतरित किया था। इसके बाद इन सभी संदेशों को अत्यंत पवित्रता के साथ संकलित किया गया।
यह पवित्र ग्रंथ केवल धार्मिक अनुष्ठानों या पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक इंसान को जीवन जीने का सही मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। इसमें न्याय, भाईचारा, दया, और नैतिक मूल्यों का संदेश दिया गया है। दुनिया भर में करोड़ों लोग प्रतिदिन इसका पाठ करते हैं और इसके उपदेशों को अपने दैनिक जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं।
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