क्या विवाह भाग्य में लिखा होता है?
कई बार हम सुनते हैं कि दो लोग इसलिए शादी करते हैं क्योंकि यह उनका भाग्य होता है। लोग कहते हैं—“मिलन लिखा था”, “नियति ने जोड़ा है”, “किस्मत में था यह सब”। ऐसे कथनों में कुछ सच जरूर है, लेकिन क्या सचमुच हर शादी पहले से तय होती है?
शायद कुछ बातें वाकई भाग्य में होती हैं। जैसे कोई अचानक एक ऐसे शख्स से मिले, जिसके साथ जीवन बन जाए। ऐसे मौके ऐसे लगते हैं मानो कोई गहरी नियति काम कर रही हो। लेकिन क्या सिर्फ भाग्य ही जिम्मेदार है? क्या प्यार, समझ, साझा दृष्टिकोण और संयंत्र की कोई भूमिका नहीं?
ज़िन्दगी में कई बार ऐसे लोग भी मिल जाते हैं जिनके साथ तालमेल नहीं बैठता, भले ही वह "मंगल के योग" से तय हों। वहीं, कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं जो छोटी-छोटी बातों से शुरू होकर प्यार में बदल जाते हैं। तो क्या इसे सिर्फ भाग्य कहेंगे या उन पलों की नायाबी को मानेंगे जो दोनों ने साथ बनाई?
शायद सच बीच में है। भाग्य शायद मुलाकात
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