असली सरसों के तेल की पहचान और इसकी सच्चाई

अक्सर लोग सोचते हैं कि हर वह तेल जिसमें सरसों की खुशबू हो, वह सरसों का तेल ही होता है। लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है। केवल सरसों के बीजों का स्वाद या सुगंध मिलाकर बनाए गए तेल और असली सरसों के तेल में बड़ा अंतर होता है। असली सरसों का तेल वह वसा (Fat) है, जिसे सीधे सरसों के पौधे के बीजों से दबाकर या निचोड़कर निकाला जाता है।

दुनिया भर में इसके अलग-अलग स्रोतों का इस्तेमाल होता है। भारत में पारंपरिक रूप से काली सरसों के बीजों (Brassica nigra) से तेल निकाला जाता है, जिसका स्वाद बेहद तीखा और रंग गहरा होता है। दूसरी ओर, रूस और चीन जैसे देशों में भूरी सरसों के बीजों (Brassica juncea) का उपयोग अधिक किया जाता है।

विदेशों में अक्सर इसकी बोतलों पर "For External Use Only" (केवल बाहरी उपयोग के लिए) लिखा होता है। इसका कारण इसमें मौजूद इरूसिक एसिड (Erucic Acid) की उच्च मात्रा है, जिसे पश्चिमी देशों में सुरक्षा मानकों के तहत खाने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इसके बावजूद, भारतीय रसोई में सदियों से इसका इस्तेमाल सही तरीके से गर्म करके खाना पकाने और अचार बनाने के लिए होता आया है।

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