हमारा सबसे बड़ा दुश्मन: एक कड़वा सच

अक्सर जब हमसे पूछा जाता है कि भारत या किसी संस्था का सबसे बड़ा दुश्मन कौन है, तो हमारे दिमाग में सरहद पार के देश या कोई बाहरी ताकतें आती हैं। लेकिन अगर हम गहराई से सोचें और अपने समाज पर नज़र डालें, तो एक कड़वी सच्चाई सामने आती है। कई बार हमारे सबसे बड़े विरोधी बाहरी नहीं, बल्कि हमारे अपने ही समाज के लोग होते हैं।

किसी भी देश या व्यक्ति की प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट वे लोग बनते हैं जो हर मोड़ पर आपके रास्ते में अड़चनें डालते हैं। ये ऐसे लोग होते हैं जो आपकी सफलता से जलते हैं और आपका हौंसला तोड़कर आपको अपने मुकाम तक पहुँचने से रोकते हैं। जब आप कोई नया काम शुरू करते हैं या आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं, तो पीठ पीछे आपकी निंदा करना और आपको बदनाम करने की साजिश रचना कुछ लोगों की आदत बन जाती है।

सबसे दुखद बात यह है कि जब आप किसी मुसीबत या तकलीफ में होते हैं, तो इन लोगों को अंदर से खुशी मिलती है। किसी भी देश की वास्तविक ताकत उसके नागरिकों की एकता और सकारात्मक सोच में होती है। जब तक हम एक-दूसरे को नीचा दिखाने की मानसिकता से बाहर नहीं निकलेंगे और एक-दूसरे की टांग खींचने के बजाय हाथ थामना नहीं सीखेंगे, तब तक हम सही मायनों में आगे नहीं बढ़ सकते। तरक्की के लिए बाहरी दुश्मनों से ज़्यादा अंदरूनी नकारात्मकता से लड़ना ज़रूरी है।

यह भी देखें

विस्तृत लेख

संबंधित विषय