अधिक पूजा-पाठ करने वाले क्यों परेशान रहते हैं?
कई बार हम देखते हैं कि कुछ लोग लगातार पूजा-पाठ, व्रत और तपस्या में लगे रहते हैं, लेकिन फिर भी उनके जीवन में चिंता, तनाव और दुख कम नहीं होते। ऐसा क्यों होता है?
ज्यादा पूजा करना अच्छी बात है, लेकिन नीयत और समझ भी ज़रूरी है। जब कोई व्यक्ति भक्ति के सही स्वरूप को नहीं समझता, तो वह अनजाने में सकाम भक्ति करने लगता है। यानी वह पूजा करता तो है, लेकिन उसके पीछे छिपी है चाहत – सुख, सम्मान, धन या दूसरों से बेहतर होने की इच्छा।
ऐसी भक्ति मन को शांत नहीं करती। वरन, वह व्यक्ति इतना पूजा करने के बाद भी फल की अपेक्षा में फंस जाता है। जब फल तुरंत नहीं मिलता, तो निराशा होती है। इसलिए उन परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
सच्ची भक्ति वह है जहां पूजा करने वाला फल की इच्छा छोड़ दे। वह भगवान को प्रेम और श्रद्धा से पूजता है, न कि डील बनाने के लिए। जब मन निष्काम हो जाता है, तो पूजा सचमुच
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