पाकिस्तान पर भारत का बकाया
भारत और पाकिस्तान के विभाजन को दशकों बीत चुके हैं, लेकिन इतिहास के कई वित्तीय और प्रशासनिक पन्ने आज भी पूरी तरह सुलझ नहीं पाए हैं। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा दोनों देशों के बीच हुए बंटवारे के समय के कर्ज और संपत्तियों के लेन-देन से जुड़ा है।
एक सार्वजनिक याचिका (PIL) के अनुसार, प्री-पार्टीशन यानी विभाजन से पहले के समय के कर्ज और उस पर लगे ब्याज को जोड़कर यह बकाया राशि लगभग 10,000 करोड़ रुपये तक बैठती है। शुरुआत में भारत सरकार के बजट दस्तावेजों में यह राशि करीब 300 करोड़ रुपये बतौर प्री-पार्टीशन कर्ज के रूप में दिखाई जाती थी, जो समय के साथ ब्याज और अन्य वित्तीय गणनाओं के कारण बढ़ती गई।
हालांकि इस तरह के मामलों में अदालतों और सरकारों का रुख यही रहा है कि ये नीतिगत और कूटनीतिक मसले हैं, जिन्हें कूटनीतिक माध्यमों से ही हल किया जा सकता है। विभाजन के वक्त हुए समझौतों और परिसंपत्तियों के बंटवारे का यह इतिहास आज भी दोनों देशों के बीच चर्चा का एक अहम और जटिल विषय बना हुआ है।
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