प्राचीन भारत में दास प्रथा और मेगस्थनीज का विवरण
यूनानी राजदूत मेगस्थनीज ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'इंडिका' में लिखा था कि भारत में गुलामी (दास प्रथा) नहीं थी। चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल के दौरान भारत आए मेगस्थनीज ने देखा कि भारतीय समाज में सभी लोगों को स्वतंत्र माना जाता था और यूनान की तरह यहाँ मनुष्यों के साथ क्रूर व्यवहार या उन्हें संपत्ति की तरह बेचने की प्रथा नहीं थी।
हालांकि, आधुनिक इतिहासकारों और 'अर्थशास्त्र' जैसे प्राचीन भारतीय ग्रंथों के अनुसार, भारत में दासों और सेवकों की उपस्थिति थी। लेकिन यूनान और रोम में जिस तरह की अत्यंत कठोर और अमानवीय दास प्रथा प्रचलित थी, उसकी तुलना में भारत में दासों के अधिकार और स्थितियाँ काफी अलग थीं। यही कारण था कि मेगस्थनीज भारतीय समाज की इस व्यवस्था को देखकर भ्रमित हो गए और उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत में गुलामी का कोई अस्तित्व ही नहीं है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।