ईश्वर और समय: क्या वह समय के भीतर या बाहर है?
ईश्वर और समय के संबंध को लेकर हजारों सालों से दार्शनिक और धार्मिक विचारक सोचते आए हैं। एक प्रमुख पारंपरिक दृष्टिकोण यह है कि ईश्वर समय के बाहर है। यह नहीं कहा जा सकता कि वह किसी विशेष क्षण में मौजूद है – न अतीत में, न वर्तमान में, न भविष्य में। फिर भी, वह पूरी तरह से विद्यमान है।
इसे कालातीत (timeless) स्थिति कहा जाता है। जैसे हम एक नदी के किनारे खड़े होकर उसके पानी को बहते हुए देखते हैं, उसी तरह ईश्वर को कभी भी 'अनुभव' नहीं होता कि समय बीत रहा है। उसके लिए पूरा समय एक साथ मौजूद है। वह न तो इंतजार करता है, न याद करता है – क्योंकि उसकी दृष्टि में सब कुछ साथ-साथ है।
यह विचार आध्यात्मिक ग्रंथों और दर्शन में गहराई तक फैला है। उदाहरण के लिए, भगवद्गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि वे सभी कालों के स्वामी हैं। यह नहीं कि वे समय के अधीन हैं, बल्कि समय उनके अधीन है।
तो जवाब साफ है: ईश्वर समय में नहीं
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