बच्चे किस सुख की माँग करते हैं?
रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता "ए प्रेयर इन स्प्रिंग" प्रकृति के प्रति एक सरल, निष्कपट प्रेम को दर्शाती है। इस कविता में बच्चों की तरह सीधी और मनमोहक माँग सुनाई देती है। कवि कहता है कि वसंत के समय हमें जो सुख मिलता है, उसे सिर्फ भविष्य की चिंताओं में न खोएं।
कविता की पहली और पाँचवीं पंक्ति में, वक्ता प्रार्थना करता है – "फूलों में आनंद" और "बाग में" खुशी मिले। ये बच्चों जैसी सरल इच्छाएँ हैं। बच्चे न तो धन के लिए रोते हैं, न भविष्य की फिक्र में जागते हैं। वे तो फूलों के रंग, पेड़ों की छाया और हवा में झूलती कोपलों में खुशी ढूंढते हैं।
फ्रॉस्ट यहाँ यह कहना चाहते हैं कि हम भी बच्चों की तरह वर्तमान के पलों में जीना सीखें। बाग में खिले फूल, सुबह की ओस, पक्षियों की चहचहाहट – ये सब छोटी चीजें हैं, लेकिन इनमें छिपा है असली सुख।
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