बैठक और प्रसव का समय जैसे-जैसे नजदीक आता है, गर्भवती महिलाओं में प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) और नॉर्मल डिलीवरी को लेकर उत्सुकता बढ़ जाती है। सुरक्षित और प्राकृतिक प्रसव के लिए सही समय पर बच्चेदानी का मुंह (सर्विक) खुलना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए गर्भावस्था के आखिरी दिनों, विशेषकर नौवें महीने में कुछ पारंपरिक और प्रभावी घरेलू उपायों को आजमाया जा सकता है।

नौवें महीने में खजूर का सेवन

गर्भावस्था के नौवें महीने में नियमित रूप से खजूर खाना बेहद फायदेमंद माना जाता है। वैज्ञानिक रूप से भी यह माना गया है कि खजूर गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत करता है और प्रसव के लिए शरीर को तैयार करता है। इसके सेवन के लिए एक गिलास दूध को गर्म होने के लिए रख दें और उसमें तीन से चार खजूर डाल दें। इस दूध को अच्छी तरह से उबालें और फिर छानकर हल्का गुनगुना होने पर पी लें। खजूर वाला यह दूध शरीर को ताकत भी देता है।

गुनगुने दूध में घी का प्रयोग

इसके अलावा, एक अन्य प्रचलित उपाय नौवें महीने में गुनगुने दूध में एक चम्मच शुद्ध देसी घी मिलाकर पीना है। माना जाता है कि यह गर्भाशय के मार्ग को चिकना करता है और मांसपेशियों के संकुचन को बढ़ावा देता है, जिससे बच्चेदानी का मुंह समय पर खुलने में मदद मिलती है।

हल्की कसरत और खान-पान

इन पारंपरिक उपायों के साथ-साथ, आखरी हफ्तों में सक्रिय रहना भी आवश्यक है। डॉक्टर की सलाह पर हल्की सैर (वॉक) करना और पेल्विक एक्सरसाइज (जैसे बटरफ्लाई स्ट्रेच) करना फायदेमंद होता है। यह बच्चे को सही पोजीशन में लाने और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को लचीला बनाने में मदद करता है। किसी भी नए उपाय को शुरू करने से पहले अपनी डॉक्टर से परामर्श जरूर लें ताकि आपकी गर्भावस्था की स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन मिल सके।

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