बाल विवाह के दुष्प्रभाव
बाल विवाह आज भी भारत के कई ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में एक गहरी समस्या है। जब किसी लड़की की शादी किशोरावस्था में ही कर दी जाती है, तो उसका पूरा भविष्य संकट में पड़ जाता है।
इस रिवाज के कारण लड़कियों को आगे पढ़ाई करने का मौका नहीं मिल पाता। ज्यादातर मामलों में लड़की स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाती है। पढ़ाई के अभाव में उसके स्वावलंबन के अवसर कम हो जाते हैं। वह नौकरी नहीं पा पाती, न ही घर या समाज में अपनी आवाज उठा पाती है।
इसके अलावा, कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों को घरेलू हिंसा का ज्यादा खतरा रहता है। शारीरिक रूप से अपरिपक्व होने के कारण उनके स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है। गर्भधारण के समय जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि बाल विवाह का असर सिर्फ लड़की तक ही नहीं रहता। पूरा परिवार, बच्चे और समुदाय इसके प्रतिकूल प्रभावों को भुगतते हैं। गरीबी चक्र जारी रहता है, और सामाजिक
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