ईस्ट इंडिया कंपनी: व्यापार से भारत पर अधिकार का सफर

वर्ष 1600 में ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने ईस्ट इंडिया कंपनी को एशिया में व्यापार करने की शाही अनुमति दी थी। शुरुआती समय में इस कंपनी का मुख्य उद्देश्य भारत से यूरोप में मसाले, चाय, रेशम और कीमती वस्तुएँ मंगाना था। व्यापार के बहाने भारत आई इस कंपनी ने धीरे-धीरे यहाँ की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में दखल देना शुरू कर दिया।

कंपनी ने भारतीय रियासतों की आपसी फूट का फायदा उठाया और देखते ही देखते देश के बड़े भू-भाग पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। 18वीं सदी में प्लासी और बक्सर की लड़ाइयों के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी केवल एक व्यापारी नहीं, बल्कि भारत की मुख्य शासक बन बैठी। हालांकि, 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का नियंत्रण सीधे ब्रिटिश क्राउन के हाथों में सौंप दिया गया।

इतिहास का सबसे रोचक पहलू यह है कि जिस ईस्ट इंडिया कंपनी ने कभी पूरे भारत पर राज किया था, आज उसका मालिकाना हक एक भारतीय के पास है। वर्ष 2005 में भारतीय मूल के व्यवसायी संजीव मेहता ने इस ऐतिहासिक कंपनी के सभी अधिकार खरीद लिए। आज यह कंपनी एक लग्ज़री ब्रांड के रूप में चाय, कॉफ़ी और उपहारों का कारोबार करती है।

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