वंदे मातरम: राष्ट्रभक्ति का अमर उद्घोष
वंदे मातरम भारत के राष्ट्रीय गौरव और स्वाधीनता संग्राम का एक ऐसा प्रतीक है, जिसे सुनते ही हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है। यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि देश के प्रति अगाध प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति है।
इस महान नारे की उत्पत्ति का श्रेय बंगाल के प्रसिद्ध उपन्यासकार और स्वतंत्रता सेनानी बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को जाता है। उन्होंने साल 1870 के दशक में इस गीत की रचना की थी और बाद में साल 1882 में अपने विख्यात उपन्यास 'आनंदमठ' में इसका इस्तेमाल किया। देखते ही देखते यह गीत अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय जनमानस की आवाज बन गया।
इतिहास में इस नारे का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया, जब साल 1896 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे राजनीतिक मंच पर गाया। इसके बाद से यह स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य मंत्र बन गया, जिसने लाखों देशवासियों को एकजुट किया और आज भी यह हमारे दिलों में देशभक्ति की अलख जगाए रखता है।
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