भगवान विष्णु और उनकी अर्धांगिनी माता लक्ष्मी

सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना गया है। वे पूरे ब्रह्मांड का संचालन करते हैं और अपने भक्तों की हर विपत्ति से रक्षा करते हैं। जब बात आती है कि विष्णु जी की पत्नी या उनकी अर्धांगिनी कौन हैं, तो धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार माता लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान चौदह रत्नों में से एक माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। प्रकट होने के बाद माता लक्ष्मी ने स्वयं भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुना और उनके गले में वरमाला डाली। तब से वे क्षीर सागर में शेषनाग पर विराजमान भगवान विष्णु के साथ निवास करती हैं और उनके चरणों की सेवा करती हैं।

माता लक्ष्मी को धन, समृद्धि, वैभव और सौभाग्य की देवी माना जाता है। हिंदू संस्कृति में विष्णु और लक्ष्मी की जोड़ी को 'लक्ष्मी-नारायण' के रूप में पूजा जाता है। यह जोड़ी संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए संतुलन और प्रेम का प्रतीक है। जब-जब भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अवतार लिया, माता लक्ष्मी ने भी अलग-अलग रूपों में उनके साथ जन्म लिया, जैसे श्री राम के अवतार में वे माता सीता बनीं और श्री कृष्ण के अवतार में वे रुक्मिणी के रूप में प्रकट हुईं।

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