शेषनाग पर कौन सोता है?
हिंदू धर्म की मान्यताओं और पुराणों में भगवान विष्णु का शेषनाग पर विश्राम करते हुए चित्र बहुत प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि जब सृष्टि का अंत होता है और सब कुछ विलय में चला जाता है, तब भगवान विष्णु शेषनाग के ऊपर अनंत जल में शयन करते हैं।
शान्ताकारं भुजगशयनं—यह श्लोक उनके शांत स्वरूप और शेषनाग पर विश्राम करने की बात करता है। शेषनाग न केवल एक सर्प हैं, बल्कि उनका तात्पर्य अनंतता और सृष्टि के संतुलन से भी है। मान्यता है कि शेषनाग सृष्टि के भार को संभाले रहते हैं, और उनकी पृष्ठभूमि पर भगवान विष्णु निष्क्रिय नहीं, बल्कि सक्रिय विश्राम में रहते हैं—ताकि फिर सृष्टि की रचना हो सके।यह दृश्य केवल धार्मिक कल्पना नहीं, बल्कि एक गहरे दार्शनिक सत्य का प्रतीक है। विष्णु का शेषनाग पर विश्राम करना याद दिलाता है कि सृष्टि के चक्र में विश्राम भी एक क्रिया है। विश्राम में भी शक्ति है, संतुलन है, और सृजन की आशा है।
टिप्पणियाँ
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं। सबसे पहले प्रतिक्रिया दें।