श्री कृष्ण: राजपूत या अहीर – कौन सही?

श्री कृष्ण को लेकर आज भी कई सवाल उठते हैं, जिनमें सबसे आम यह है कि वे राजपूत थे या अहीर? दरअसल, यह सवाल काल और वंश के भ्रम से उत्पन्न हुआ है। श्री कृष्ण का जन्म यदुवंशी क्षत्रियों में हुआ था। वे मथुरा के राजकुमार थे, जिसका अर्थ है कि उनकी जन्मजात पहचान एक राजपूत के बराबर थी।

लेकिन जब उनके जन्म के बाद कंस के डर से उन्हें गोकुल ले जाया गया, तो उनका पालन-पोषण आभीर ग्वालों के बीच हुआ। यहाँ उनका संस्कार, लीलाएँ और बाल लीला गोप-गोपिकाओं के बीच बीती। इसी वजह से कई लोग उन्हें अहीर समुदाय से जोड़ने लगे। लेकिन इतिहास और पुराणों के अनुसार, उन ग्वालों का यदुवंश से कोई सम्बन्ध नहीं था।

आज भी जादौन, भाटी, जाड़ेजा, चुडासमा, सरवैया, रायजादा, सलारिया, छोकर और जाधव राजपूत अपने आप को श्री कृष्ण के वंशज मानते हैं। ये सभी यदुवंश की ही शाखाएँ हैं। इसलिए, भले ही कृष्ण की लीला गोकुल में हुई हो, लेकिन उन

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