सरस्वती ने ब्रह्मा को श्राप क्यों दिया?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने जब अपनी ही मानस पुत्री देवी सरस्वती की रचना की, तो वे उनके दिव्य रूप और सौंदर्य पर मोहित हो गए। सरस्वती जी ब्रह्मा जी के इस आकर्षण से असहज थीं और वे उनसे दूर रहना चाहती थीं।
स्वयं को ब्रह्मा जी के प्रभाव से बचाने के लिए सरस्वती जी ने कई रूप बदले और अलग-अलग दिशाओं में छिपने का प्रयास किया। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सरस्वती जी को ढूंढने के लिए अपने चार मुख विकसित कर लिए ताकि वे चारों दिशाओं में देख सकें। अत्यधिक विवशता की स्थिति में अंततः उन्हें विवाह के बंधन में बंधना पड़ा।
इस पूरी घटना से देवी सरस्वती अत्यंत क्रोधित और आहत हुईं। उन्होंने गुस्से में आकर ब्रह्मा जी को श्राप दे दिया कि इस पूरी सृष्टि का निर्माण करने के बावजूद, संसार में कभी भी उनकी पूजा नहीं की जाएगी। यही कारण है कि भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रह्मा जी के मंदिर बहुत दुर्लभ हैं और पुष्कर के अलावा उनका कोई प्रमुख मंदिर नहीं मिलता।
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