कृषि प्रधान भारत देश में बिहार राज्य की पहचान हमेशा से इसकी उपजाऊ भूमि, ग्रामीण संस्कृति और बहुसंख्यक कृषि आधारित आबादी के रूप में रही है। जब भी हम यह सवाल पूछते हैं कि "बिहार में कुल कितने किसान हैं?", तो इसका उत्तर केवल एक साधारण आंकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक रीढ़, सामाजिक ताने-बाने और राजनीतिक नीतियों का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधिकारिक आंकड़ों, कृषि जनगणना (Agriculture Census) और सरकारी पोर्टल्स के अनुसार बिहार में किसानों की संख्या और उनकी श्रेणियों का एक विस्तृत विवरण मिलता है।

1. कृषि जनगणना और कुल जोतों (Operational Land Holdings) के आंकड़े

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत होने वाली कृषि जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में कुल परिचालन जोतों (Operational Land Holdings) की संख्या लगभग 1.64 करोड़ (16.4 मिलियन) के आसपास दर्ज की गई है। हालांकि, पारंपरिक रूप से पारिवारिक इकाइयों और भूमि के छोटे टुकड़ों को ध्यान में रखा जाए, तो राज्य में सक्रिय किसानों की संख्या सरकारी योजनाओं (जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और बिहार कृषि विभाग के पोर्टल) के अंतर्गत रजिस्टर्ड आंकड़ों के आधार पर 70 लाख से लेकर 73 लाख से अधिक सक्रिय परिवारों तक फैली हुई है।

राज्य की कुल आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनयापन का मुख्य साधन आज भी कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्र (जैसे पशुपालन, बागवानी और मत्स्य पालन) ही हैं।

2. सीमांत और छोटे किसानों की बहुलता

बिहार की कृषि व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ जोतों का अत्यधिक खंडित और छोटा होना है। राज्य के कुल किसानों में से एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिनके पास बेहद कम जमीन है:

  • सीमांत किसान (Marginal Farmers): वे किसान जिनके पास 1 हेक्टेयर से कम भूमि है, वे बिहार में कुल किसानों का लगभग 82% से 83% हिस्सा बनाते हैं।

  • छोटे किसान (Small Farmers): जिन किसानों के पास 1 से 2 हेक्टेयर तक की जमीन है, वे लगभग 9% से 10% की श्रेणी में आते हैं।

  • मध्यम और बड़े किसान: इसके मुकाबले 2 हेक्टेयर से अधिक भूमि वाले मध्यम और बड़े किसानों का प्रतिशत बहुत ही कम (लगभग 7% से 8% के आसपास) रह जाता है।

इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि बिहार के अधिकांश किसान "सीमांत" श्रेणी के अंतर्गत आते हैं, जिसके कारण आधुनिक और महंगे कृषि यंत्रों को अपनाना उनके लिए आर्थिक रूप से एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

3. सरकारी योजनाएं और डिजिटल पंजीकरण का विस्तार

हाल के वर्षों में बिहार सरकार और केंद्र सरकार ने किसानों के सटीक आंकड़े जुटाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ाया है। बिहार कृषि विभाग के डीबीटी (DBT) पोर्टल और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत राज्य के करोड़ों किसानों का पंजीकरण किया गया है।

हालिया बजट और सरकारी घोषणाओं के अनुसार, राज्य में लगभग 73 लाख से अधिक किसानों को वित्तीय सहायता योजनाओं का सीधा लाभ मिल रहा है। किसानों की आय को बढ़ाने और उन्हें आर्थिक संबल देने के लिए राज्य सरकार ने केंद्रीय योजनाओं के साथ-साथ अपनी तरफ से भी विशेष अनुदान और सहायता राशि (जैसे कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि या कृषि इनपुट अनुदान) प्रदान करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

इस वीडियो में बिहार के किसानों से जुड़ी सरकारी योजनाओं और अनुदान के वितरण के बारे में और अधिक जानकारी दी गई है: बिहार के किसानों को अनुदान राशि वितरण