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संघर्ष और कर्तव्य की अनूठी मिसाल
छोटे जादूगर की यह कहानी केवल मनोरंजन या तमाशे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे बालक के असाधारण आत्मसम्मान, त्याग और कर्तव्यबोध को उजागर करती है, जिसने बहुत कम उम्र में ही जीवन की कठोर वास्तविकताओं का सामना कर लिया था। उसके पिता देश के लिए जेल में बंदी थे और उसकी माता अत्यंत गंभीर रूप से बीमार थीं। ऐसे विपरीतः हालातों में भी वह किसी के आगे हाथ फैलाने के बजाय अपनी कला और मेहनत के बल पर दो वक्त की रोटी कमाने और अपनी माँ की दवा का प्रबंध करने में जुटा रहता था।
कहानी के अंतिम पड़ाव में जब वह कोलकाता के बोटैनिकल उद्यान में अपना खेल दिखा रहा होता है, तब उसकी वाणी में वह पहले जैसी स्फूर्ति और चंचलता नहीं होती। उसके भीतर एक भयंकर मानसिक द्वंद्व चल रहा होता है, क्योंकि उसे आभास हो चुका होता है कि उसकी माँ की अंतिम घड़ी निकट है। इसके बावजूद, अपनी आर्थिक लाचारी और पेट की आग बुझाने के लिए वह दर्शकों को हंसाने का विवश प्रयास करता है। यह दृश्य पाठकों के मन को झकझोर कर रख देता है और सोचने पर मजबूर कर देता है किशोरावस्था की दहलीज पर खड़ा वह बालक किस प्रकार अपनी टूटी हुई मनोदशा के साथ जीवन के रथ को खींच रहा था।
जब लेखक उसे उसकी माँ की अंतिम अवस्था की सूचना मिलने पर तुरंत अपनी मोटर से उसकी झोपड़ी तक पहुँचाता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। माँ के मुँह से निकला अधूरा शब्द और उसके प्राण त्यागने का वह मर्मस्पर्शी क्षण पाठक की आँखें नम कर देता है। जयशंकर प्रसाद जी ने इस कहानी के माध्यम से यह संदेश दिया है कि सच्ची जादूगरी किसी हाथ की सफाई में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी हार न मानने वाले अदम्य साहस और अपने माता-पिता के प्रति अटूट प्रेम व समर्पण भाव में छिपी होती है। छोटा जादूगर बाल्यकाल की मासूमियत और उत्तरदायित्व के बीच का एक ऐसा जीवंत प्रतीक बन जाता है, जो हमेशा के लिए अमर हो जाता है।
यह वीडियो जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित इस प्रेरणादायक कहानी के सारांश और उसके भावार्थ को विस्तार से समझने में मदद करता है।
छोटा जादूगर - जयशंकर प्रसाद | Chota jadugar story in hindi Kidda TV · 3.8K views
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