भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव चाहे कितना भी गहरा हो, लेकिन व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे से पूरी तरह अलग नहीं हो पाए हैं। सीधे शब्दों में कहें तो भारत चीन से सबसे अधिक इलेक्ट्रॉनिक सामान, सक्रिय दवा सामग्री (API), मशीनरी, जैविक रसायन और उर्वरक आयात करता है। यह निर्भरता रातों-रात खत्म होने वाली नहीं है, क्योंकि हमारे विनिर्माण क्षेत्र की बुनियाद में चीनी कच्चे माल की अहम भूमिका है।
आयात का चक्रव्यूह: आंकड़ों के आईने में हकीकत की पड़ताल
जब हम चीन से होने वाले आयात की बात करते हैं, तो अक्सर लोगों के दिमाग में केवल सस्ते खिलौने या दीवाली की लाइटें आती हैं। लेकिन यह तो समुद्र की ऊपरी सतह मात्र है। असली खेल तो उन औद्योगिक कलपुर्जों का है, जिनके बिना भारत के बड़े-बड़े कारखाने ठप पड़ सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में भारत का व्यापार घाटा चीन के साथ बढ़ा है, जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यह समझना बेहद जरूरी है कि चीन केवल 'फिनिश्ड गुड्स' का निर्यातक नहीं है, बल्कि वह भारत के लिए 'बैकएंड सपोर्ट' की तरह काम करता है।
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