बच्चे क्यों होते हैं मन के सच्चे?
बच्चे मासूमियत की मिसाल होते हैं। उनके मन में न तो दिखावा होता है, न छल-कपट। इसीलिए कहा जाता है कि बच्चे मन के सच्चे होते हैं।
उनकी सच्चाई इस बात में छुपी है कि वे बिना किसी पूर्वधारणा के दुनिया को देखते हैं। उन्हें अभी यह नहीं पता होता कि कौन अमीर है, कौन गरीब, कौन अच्छा या बुरा। वे न तो किसी से डरते हैं, न उनके बारे में बुरा सोचते हैं। अगर वे किसी को देखकर हंस देते हैं, तो वह उपहास नहीं, बल्कि निहत्थे मन की खुशी होती है।उनकी भावनाएँ सीधी होती हैं। वे जो महसूस करते हैं, वही दिखाते हैं। अगर खुश हैं, तो हंस पड़ते हैं। अगर डरे हैं या उदास हैं, तो रो देते हैं। उनमें छिपाने की आदत नहीं होती। यही उनकी सच्चाई है।
हम बड़े होकर इस सच्चाई को खो देते हैं। समाज, शिक्षा और अनुभवों के बीच हम सीख जाते हैं कि कब झूठ बोलना है, कब चुप रहना है और किससे दूर रहना है। बच्चे नहीं जानते इन बातों को, इसल
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