ग्लूकोमीटर और लैब टेस्ट में अंतर: क्या दोनों एक जैसे हैं?

डायबिटीज के मरीज हर रोज अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच के लिए ग्लूकोमीटर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार यह जांच लैब टेस्ट से थोड़ी अलग आती है, जिससे लोगों में भ्रम हो जाता है। आखिर ग्लूकोमीटर और लैब टेस्ट में कितना अंतर है?

वैसे तो दोनों तरीके ब्लड में शुगर की मात्रा मापते हैं, लेकिन तरीका अलग होता है। ग्लूकोमीटर घर पर तुरंत परिणाम देता है — बस एक छोटी सी उंगली की खरोंच से कैपिलरी ब्लड (छोटी नसों का रक्त) में ग्लूकोज का पता लगाता है। वहीं, लैब टेस्ट में वेनस ब्लड (नसों से निकाला गया रक्त) का विश्लेषण होता है, जो थोड़ा अधिक सटीक माना जाता है।

सामान्यतः, ग्लूकोमीटर के परिणाम लैब टेस्ट से 10 से 15% तक अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, अगर लैब में शुगर 150 mg/dL आई है, तो ग्लूकोमीटर 135 से 170 mg/dL के बीच कुछ भी दिखा सकता है। यह अंतर सामान्य माना जाता है, खास

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