पूर्ण फूल कौन है?

कई बार हम फूलों को देखकर सोचते हैं कि इनमें आखुर क्या-क्या होता है। एक पूर्ण फूल वह कहलाता है जिसमें सभी चार मुख्य भाग मौजूद हों – बाह्यदल, दल (या पंखुड़ियां), पुंकेसर और अंडप। इन चारों के होने पर ही फूल को पूर्ण माना जाता है।

उदाहरण के तौर पर, गुलाब, गेंदा या लैहरी के फूल पूर्ण फूलों में शामिल हैं। इनमें नर (पुंकेसर) और मादा (अंडप) दोनों युग्मन अंग होते हैं, इसलिए इन्हें उभयलिंगी फूल भी कहा जाता है।

लेकिन सभी फूल पूर्ण नहीं होते। कुछ फूलों में या तो केवल पुंकेसर होता है या केवल अंडप। ऐसे फूल एकलिंगी कहलाते हैं। उदाहरण के लिए, ककड़ी या तरबूज के पौधों में अलग-अलग नर और मादा फूल होते हैं।

इसलिए याद रखें – पूर्ण फूल का मतलब है सभी भागों से युक्त फूल, जबकि उभयलिंगी होना का अर्थ है उसमें नर और मादा दोनों जनन अंगों का मौजूद होना। ये दोनों अलग अवधारणाएं हैं, हालांकि कई बार एक साथ भी

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