पवित्र का अर्थ: सिर्फ धार्मिक नहीं, शुद्धता का भी संकेत

पवित्र शब्द सुनते ही अक्सर दिमाग में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च जैसी जगहों की तस्वीर आ जाती है। लेकिन इसका एक और गहरा अर्थ भी है — जो गंदा, मैला या खराब न हो।

पवित्र का मतलब होता है शुद्ध, निर्मल और साफ। कोई भी व्यक्ति, स्थान या वस्तु तब पवित्र कहलाती है जब उसमें अशुद्धि का ताना न हो। जैसे नदी का जो पानी बिल्कुल साफ होता है, बिना किसी गंदगी के, उसे भी पवित्र कहा जा सकता है। इसी तरह मन की पवित्रता का अर्थ है — बुराइयों से मुक्त होना, झूठ, ईर्ष्या या लोभ से दूर रहना।

हमारे संस्कारों में भी पवित्रता का बहुत महत्व है। घर में जब कोई पूजा होती है, तो सबसे पहले साफ-सफाई की जाती है — क्योंकि बाहरी सफाई भी पवित्रता का ही हिस्सा है। लेकिन असली पवित्रता वही है जो भीतर से आती है — जहाँ दिल साफ हो, इरादे निर्मल हों।

इसलिए पवित्र नाम सिर्फ किसी वस्तु या जगह का नहीं, बल्कि व्यवहार, सोच और आचर

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