शिवाजी की तलवार: एक ऐतिहासिक विरासत की यात्रा

छत्रपति शिवाजी महाराज की तलवार सिर्फ एक हथियार नहीं, बल्कि मराठा गौरव का प्रतीक है। इतिहासकार इंद्रजीत सावंत के अनुसार, जिन्होंने इस तलवार की यात्रा पर किताब 'शोध भवानी तलवारिचा' लिखी, यह तलवार कभी करवीर के छत्रपति के पास थी, जिन्होंने शिवाजी महाराज द्वारा उपयोग की गई इस ऐतिहासिक वस्तु की रक्षा की।

1875-76 में, शिवाजी चतुर्थ, जो करवीर नागरी के अंतिम शासक थे, ने इस तलवार को एडवर्ड, प्रिंस ऑफ वेल्स (बाद में राजा एडवर्ड सप्तम) को उपहार स्वरूप दे दिया। यह तब का दौर था जब भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और कई राजघराने अंग्रेजों के साथ संबंध बनाए रखने के लिए ऐसे उपहार देते थे।

यह तलवार आज भी ब्रिटेन में है और महाराष्ट्र सरकार समेत कई संगठन इसे वापस लाने की मांग कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि यह भारतीय इतिहास की जीवंत धरोहर है और इसे अपनी मातृभूमि में ही रहना चाहिए।

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