सृष्टि का प्रारंभ: मनु और शतरूपा
हिंदू पुराणों के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले प्रकट होने वाले मानव थे स्वायंभुव मनु और उनकी पत्नी शतरूपा। ये दोनों मानव जाति के प्रथम जोड़े माने जाते हैं।
भगवान ब्रह्मा, सृष्टि के स्रजनकर्ता, ने संसार की रचना करते समय सबसे पहले 11 प्रजापतियों और 11 रुद्रों का निर्माण किया। तब, सृष्टि को पूर्णता देने के लिए, उन्होंने अपने शरीर को दो भागों में विभाजित कर दिया। पहले भाग का नाम था 'का' और दूसरे का 'या'। इन्हीं नामों के संयोजन से 'काया' शब्द बना, जो आज भी शरीर के लिए प्रयोग किया जाता है।इस विभाजन के बाद 'का' का रूप मनु में और 'या' का स्वरूप शतरूपा के रूप में प्रकट हुआ। मनु को स्वायंभू कहा गया, क्योंकि उनका जन्म किसी माता-पिता के बिना स्वयं ब्रह्मा से हुआ था। शतरूपा का नाम इसलिए पड़ा क्योंकि वे अनेक रूपों में दिखाई देती थीं।
यह कथा केवल एक धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि सृष्टि की उत्पत्ति के दार्शनिक पहलू को
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