भगवान विष्णु की निद्रा और चातुर्मास का पवित्र समय

भगवान विष्णु को हिंदू धर्म में सृष्टि के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होती है, इस दिन भगवान विष्णु गहरी योग निद्रा में प्रवेश करते हैं। इस समय को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है।

इन चार महीनों के दौरान, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना के साथ-साथ लोग शुभ कार्य जैसे विवाह, गृहप्रवेश या मुंडन आदि से परहेज करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जब तक भगवान विष्णु निद्राग्रस्त रहते हैं, तब तक इन कार्यों को शुभ नहीं माना जाता।

फिर, कार्तिक माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के जागने का पावन अवसर होता है। इसके बाद सभी शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है। इस दिन से अक्षय तृतीया तक का समय विवाह और नए कार्यों के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

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