महात्मा गांधी के मुख्य सिद्धांत: सत्य और अहिंसा

महात्मा गांधी के जीवन और संघर्ष का केंद्र सत्य और अहिंसा था। ये दोनों सिद्धांत उनकी विचारधारा की आत्मा थे। गांधी जी मानते थे कि जहाँ सत्य है, वहीं ईश्वर भी है। उनके लिए सत्य सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि एक जीवन-दृष्टि थी, जिस पर चलकर व्यक्ति नैतिक और आध्यात्मिक ऊँचाई तक पहुँच सकता है।

अहिंसा के प्रति उनका विश्वास गहरा था। लेकिन यहाँ अहिंसा का अर्थ सिर्फ हिंसा न करना नहीं था। गांधी जी के अनुसार, अहिंसा प्रेम, क्षमा और दूसरों के प्रति उदारता की पराकाष्ठा है। एक अहिंसक व्यक्ति न तो किसी को शारीरिक चोट पहुँचाता है और न ही मानसिक रूप से दुख देता है। वह अपने विरोधी को भी बदलने के लिए प्रेम और सहानुभूति का उपयोग करता है।

गांधी जी ने इन सिद्धांतों को सिर्फ व्यक्तिगत जीवन तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय आंदोलनों में भी अपनाया। असहयोग, सविनय अवज्ञा और दांडी मार्च

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