राष्ट्रपिता महात्मा गांधी
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में महात्मा गांधी का नाम सबसे ऊँचे स्थान पर है। उन्हें आज पूरा देश 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित करता है। यह पदवी किसी आधिकारिक घोषणा से नहीं, बल्कि जन-मन में उनके प्रति अपार श्रद्धा के कारण मिली है।
4 जून 1944 को सुभाष चन्द्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से प्रसारित एक संदेश में महात्मा गांधी को 'देश का पिता' कहा। यह संदेश भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों के बीच गूंजा और धीरे-धीरे यह उपाधि पूरे राष्ट्र में प्रचलित हो गई। हालाँकि बोस और गांधी के मार्ग अलग थे, लेकिन बोस ने गांधी के योगदान को सलाम करते हुए यह संबोधन दिया था।भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर 'राष्ट्रपिता' शब्द को स्वीकार कर लिया है। गांधी जी के अहिंसा, सत्य और असहयोग के मार्ग ने न केवल भारत को आजादी दिलाई, बल्कि दुनिया भर के उपनिवेशित राष्ट्रों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बने।
आज, 2 अक्टूबर को उनकी जयंती पर पूरा देश उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित
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