गांधी जी का चौथा बंदर: एक आधुनिक संदेश

महात्मा गांधी के सिद्धांतों से प्रेरित तीन बंदर – न देखूं, न बोलूं, न सुनूं – लंबे समय से नैतिक जीवन के प्रतीक रहे हैं। लेकिन आज के समय में एक नया चरित्र उभर कर सामने आया है – चौथा बंदर

यह चौथा बंदर कोई ऐतिहासिक प्रतीक नहीं, बल्कि एक आधुनिक व्यंग्य है, जो स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाता है। टी-शर्ट्स और कैंपेन पोस्टर्स पर इस बंदर को 'खुले में मत हगो' का संदेश देते देखा जा सकता है। यह गांधी जी के स्वच्छता प्रेम और स्वच्छ भारत के सपने को आगे बढ़ाता है।

गांधी जी ने हमेशा शौचालय की स्वच्छता पर जोर दिया था। उनके लिए यह सिर्फ स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि गरिमा का प्रश्न था। चौथे बंदर के माध्यम से इसी विचार को हल्के अंदाज में पेश किया गया है।

यह बंदर हमें याद दिलाता है कि आज भी कई इलाकों में खुले में शौच की समस्या बरकरार है। और इसका समाधान नैतिकता और आदतों में बदलाव से ही संभव है।

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