अंग्रेज भारत क्यों आए थे?

भारत हमेशा से अपनी धन-दौलत, मसालों और रेशम के लिए पूरी दुनिया में मशहूर रहा है। इसी समृद्ध व्यापार से आकर्षित होकर 24 अगस्त 1608 को अंग्रेजों ने पहली बार भारत की धरती पर कदम रखा। ईस्ट इंडिया कंपनी के जहाज गुजरात के सूरत बंदरगाह पर पहुंचे थे। उनका शुरुआती मकसद सिर्फ और सिर्फ व्यापार करना और मुनाफा कमाना था।

शुरुआत में अंग्रेजों को यहां व्यापार करने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन इसके लगभग सात साल बाद, इंग्लैंड के राजा जेम्स प्रथम के राजदूत सर थॉमस रो मुगल दरबार में पहुंचे। उन्होंने अपनी कूटनीति से मुगल बादशाह को राजी कर लिया और अंग्रेजों को सूरत में अपनी पहली फैक्ट्री (कारखाना) स्थापित करने का शाही फरमान हासिल हो गया।

धीरे-धीरे अंग्रेजों ने व्यापार के बहाने भारत की राजनीति में दखल देना शुरू कर दिया। उस समय भारत के छोटे-छोटे राजाओं और नवाबों के बीच आपसी फूट का उन्होंने पूरा फायदा उठाया। जो अंग्रेज सिर्फ मसालों और कपड़ों का व्यापार करने आए थे, उन्होंने धीरे-धीरे पूरे भारतीय उपमहाद्वीप पर अपना राजनीतिक नियंत्रण कायम कर लिया और भारत को अपना गुलाम बना लिया।

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