चीन में काम के घंटे और कार्य संस्कृति
आज के दौर में किसी देश की आर्थिक प्रगति के पीछे वहां के लोगों की मेहनत का बहुत बड़ा हाथ होता है। जब बात एशिया की दो प्रमुख आर्थिक महाशक्तियों, भारत और चीन की आती है, तो उनके कार्य घंटों की तुलना अक्सर चर्चा का विषय बनती है। आंकड़ों और हालिया अध्ययनों की मानें तो चीन का हर इंसान भारतीयों से औसतन 45 मिनट ज्यादा काम करता है। यह समय पहली नज़र में भले ही छोटा लगे, लेकिन जब पूरे देश की विशाल आबादी और साल भर के काम को जोड़ा जाता है, तो यह अंतर बहुत बड़ा रूप ले लेता है।
चीन में काम के इस लंबे घंटे के पीछे वहां की खास कॉरपोरेट और औद्योगिक संस्कृति है। वहां विशेष रूप से टेक कंपनियों और स्टार्ट-अप्स में '996' वर्क कल्चर काफी चर्चित रहा है। इसका मतलब है सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक, हफ्ते में 6 दिन काम करना। हालांकि चीन की सरकार ने इस अत्यधिक काम के दबाव को कम करने के लिए कानूनी कदम उठाए हैं, फिर भी निर्माण, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सर्विस सेक्टर में लोग लंबे समय तक काम करते हैं।
दूसरी ओर, भारत में भी काम के घंटे कम नहीं हैं। भारतीय पेशेवर भी दुनिया में सबसे लंबे समय तक काम करने वालों में गिने जाते हैं। लेकिन चीन में उत्पादन और गति पर दिया जाने वाला जोर वहां के नागरिकों को औसतन हर दिन अतिरिक्त 45 मिनट का योगदान देने के लिए प्रेरित करता है। यही अनुशासित मेहनत और लंबा समय चीन को वैश्विक विनिर्माण का गढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
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