दिल्ली का शासक: इतिहास से वर्तमान तक

दिल्ली हमेशा से ही भारत की सत्ता का मुख्य केंद्र रही है। अगर ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें, तो पुराने ज़माने में दिल्ली की गद्दी पर तोमर, चौहान, मुग़ल और ब्रिटिश शासकों ने राज किया है। इतिहास के पन्नों में अनंगपाल तोमर से लेकर पृथ्वीराज चौहान और बहादुर शाह जफ़र जैसे नाम दिल्ली के शासक के रूप में दर्ज हैं।

लेकिन आज के लोकतांत्रिक भारत में 'राजा' या 'शाही शासन' जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। अब देश में जनता का शासन है। वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था के तहत दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) है, जहाँ शासन की बागडोर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई सरकार के हाथों में होती है।

तकनीकी और प्रशासनिक रूप से, दिल्ली के कामकाज की जिम्मेदारी मुख्य रूप से मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) के पास होती है। मुख्यमंत्री जहाँ जनता द्वारा चुनी गई सरकार का नेतृत्व करते हैं, वहीं उपराज्यपाल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में काम करते हैं। इसके अलावा, भारत के राष्ट्रपति को देश के संवैधानिक प्रमुख के रूप में दिल्ली सहित पूरे राष्ट्र का सर्वोच्च नागरिक माना जाता है। इसलिए, आज के दौर में दिल्ली का कोई एक 'राजा' नहीं है, बल्कि यहाँ की जनता ही असली शासक है जो वोट देकर अपनी सरकार चुनती है।

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