बच्चे कितने अच्छे रहते हैं? बिहार में यह मान्यता अब भी प्रबल
“दो बच्चे, बेहतर जीवन” – यह नारा कई दशकों से सरकारी जनसंख्या नियंत्रण अभियानों की रूपरेखा रहा है। लेकिन जब बिहार की बात आती है, तो स्थिति अलग दिखाई देती है। हाल की एक स्वास्थ्य सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में केवल 46.2 प्रतिशत महिलाएं ही इस बात से सहमत हैं कि दो बच्चे ही अच्छे होते हैं।
इसका मतलब यह है कि अधिकांश लोग अभी भी बड़े परिवार को सामान्य या बेहतर मानते हैं। कई कारण इसके पीछे हैं – सामाजिक मान्यताएं, आर्थिक आवश्यकता, और शिक्षा का सीमित प्रसार। कई गांवों में तो अभी भी तीन या चार बच्चों को सामान्य माना जाता है, खासकर जहां लिंग भेद की पुरानी मान्यताएं अभी भी जीवित हैं और पुत्र प्राप्ति की इच्छा लंबे समय तक चलती है।
हालांकि, शहरी क्षेत्रों में जीवन शैली में बदलाव, बेहतर शिक्षा और महिलाओं की स्वतंत्रता के कारण दो बच्चों वाले परिवार की अवधारणा धीरे-धीरे स्वीकार्य हो र
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