सुमति का साथ
एक बार एक लेखक अपने दोस्त के साथ एक छोटे से गाँव में पहुँचा। वे दोनों साधारण कपड़ों में थे, मानो भिक्षुक हों। लेकिन इसके बावजूद उन्हें गाँव में ठहरने के लिए एक अच्छी जगह मिल गई। क्यों? क्योंकि लेखक के मित्र का नाम था सुमति।
सुमति का उस गाँव के लोगों से पुराना नाता था। वह पहले भी कई बार वहाँ आ चुका था। लोगों को उसकी सादगी और दयालु प्रकृति से अच्छी तरह वाकिफीयत थी। इसलिए जब वे दोनों गाँव में आए, तो भले ही बाहर से भिखमंगे जैसे लग रहे थे, लेकिन सुमति की पहचान होते ही सबने उनका स्वागत किया।
गाँव के एक बुजुर्ग ने तो उन्हें अपने घर के पास ही छोटा सा कमरा दे दिया। बताया, "सुमति जैसा विश्वासपात्र व्यक्ति हर किसी को नसीब नहीं होता।" यह था उस गाँव की सादगी और इंसानियत का असली चेहरा।
लेखक हैरान था कि कैसे एक अच्छे संबंध और सच्चे व्यवहार के बलबूते उन्हें इतनी आसानी से आश्रय मिल गया। वह समझ गया कि नाम और वेश नहीं, बल्कि व्यव
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